Wednesday, 15 October 2025

उपनिषद नाम संग्रह

उपनिषद् सूची --

वेद शब्द का अर्थ 'ज्ञान' है। वेद-पुरुष के शिरोभाग को उपनिषद् कहते हैं। उप (व्यवधानरहित) नि (सम्पूर्ण) षद् (ज्ञान)। किसी विषय के होने न होने का निर्णय ज्ञान से ही होता है। अज्ञान का अनुभव भी ज्ञान ही कराता है। अतः ज्ञान को प्रमाणित करने के लिए ज्ञान से भिन्न किसी वस्तु की आवश्यकता नहीं है। उपनिषद् का अन्य अर्थ उप (समीप) निषत् -निषीदति-बैठनेवाला। अर्थात- जो उस परम तत्व के समीप बैठता हो। उपनिषद्यते-प्राप्यते ब्रह्मात्मभावोऽनया इति उपनिषद्। अर्थात्-जिससे ब्रह्म का साक्षात्कार किया जा सके, वह उपनिषद् है।

मुक्तिकोपनिषद् में एक सौ आठ (१०८) उपनिषदों का वर्णन आता है, इसके अतिरिक्त अडियार लाइब्रेरी मद्रास से प्रकाशित संग्रह में से १७९ उपनिषदों के प्रकाशन हो चुके है। गुजराती प्रिटिंग प्रेस बम्बई से मुदित उपनिषद्-वाक्य-महाकोष में २२३ उपनिषदों की नामावली दी गई है, इनमें उपनिषद (१) उपनिधि-त्स्तुति तथा (२) देव्युपनिषद नं-२ की चर्चा शिवरहस्य नामक ग्रंथ में है लेकिन ये दोनों उपलब्ध नहीं हैं तथा माण्डूक्यकारिका के चार प्रकरण चार जगह गिने गए है इस प्रकार अबतक ज्ञात उपनिषदो की संख्या २२० आती हैः-

कुल ज्ञात उपनिषद१-ईशावास्योपनिषद् (शुक्लयजर्वेदीय)२-अक्षिमालिकौपनिषद् (ऋग्वेदीय)३-अथर्वशिखोपनिषद् (सामवेद)४-अथर्वशिर उपनिषद् (सामवेद)५-अद्वयतारकोपनिषद् (शुक्लयजुर्वेदीय)६-अद्वैतोपनिषद्७-अद्वैतभावनोपनिषद्८-अध्यात्मोपनिषद् (शुक्लयजर्वेदीय)९-अनुभवसारोपनिषद्१०-अन्नपुर्णोंपनिषद् (सामवेद)११-अमनस्कोपनिषद्१२-अमृतनादोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)१३-अमृतबिन्दूपनिषद् (ब्रह्मबिन्दूपनिषद्) (कृष्णयजुर्वेदीय)१४-अरुणोपनिषद्१५अल्लोपनिषद१६-अवधूतोपनिषद् (वाक्यात्मक एवं पद्यात्मक) (कृष्णयजुर्वेदीय)१७-अवधूतोपनिषद् (पद्यात्मक)१८-अव्यक्तोपनिषद् (सामवेद)१९-आचमनोपनिषद्२०-आत्मपूजोपनिषद्२१-आत्मप्रबोधनोपनिषद् (आत्मबोधोपनिषद्) (ऋग्वेदीय)२२-आत्मोपनिषद् (वाक्यात्मक) (सामवेद)२३-आत्मोपनिषद् (पद्यात्मक)२४-आथर्वणद्वितीयोपनिषद्२५-आयुर्वेदोपनिषद्२६-आरुणिकोपनिषद् (आरुणेय्युपनिषद्) (सामवेद)२७-आर्षेयोपनिषद्२८-आश्रमोपनिषद्२९-इतिहासोपनिषद् (वाक्यात्मक एवं पद्यात्मक)३०-ईसावास्योपनिषदउपनषत्स्तुति (शिव रहस्यान्तर्गत, अभी तक अनुपलब्ध है।)३१-ऊध्वर्पण्ड्रोपनिषद् (वाक्यात्मक एवं पद्यात्मक)३२-एकाक्षरोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)३३-ऐतेरेयोपनिषद् (अध्यायात्मक) (ऋग्वेदीय)३४-ऐतेरेयोपनिषद् (खन्ड़ात्मक)३५-ऐतेरेयोपनिषद् (अध्यायात्मक)३६-कठरुद्रोपनिषद् (कण्ठोपनिषद्) (कृष्णयजुर्वेदीय)३७-कठोपनिषद्३८-कठश्रुत्युपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)३९-कलिसन्तरणोपनिषद् (हरिनामोपनिषद्) (कृष्णयजुर्वेदीय)४०-कात्यायनोपनिषद्४१-कामराजकीलितोद्धारोपनिषद्४२-कालाग्निरुद्रोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)४३-कालिकोपनिषद्४४-कालिमेधादीक्षितोपनिषद्४५-कुण्डिकोपनिषद् (सामवेद)४६-कृष्णोपनिषद् (सामवेद)४७-केनोपनिषद् (सामवेद)४८-कैवल्योपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)४९-कौलोपनिषद्५०-कौषीतकिब्राह्मणोपनिषद् (ऋग्वेदीय)५१-क्षुरिकोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)५२-गणपत्यथर्वशीर्षोपनिषद् (सामवेद)५३-गणेशपूर्वतापिन्युपनिषद् (वरदपूर्वतापिन्युपनिषद्)५४-गणेशोत्तरतापिन्युपनिषद् (वरदोत्तरतापिन्युपनिषद्)५५-गर्भोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)५६-गान्धर्वोपनिषद्५७-गायत्र्युपनिषद्५८-गायत्रीरहस्योपनिषद्५९-गारुड़ोपनिषद् (वाक्यात्मक एवं मन्त्रात्मक) (सामवेद)६०-गुह्यकाल्युपनिषद्६१-गुह्यषोढ़ान्यासोपनिषद्६२-गोपालपूर्वतापिन्युपनिषद् (सामवेद)६३-गोपालोत्तरतापिन्युपनिषद्६४-गोपीचन्दनोपनिषद्६५-चतुर्वेदोपनिषद्६६-चाक्षुषोपनिषद् (चक्षरुपनिषद्, चक्षुरोगोपनिषद्, नेत्रोपनिषद्)६७-चित्त्युपनिषद्६८-छागलेयोपनिषद्६९-छान्दोग्योपनिषद् (सामवेद)७०जाबालदर्शनोपनिषद् (सामवेद)७१-जाबालोपनिषद् (शुक्लयजुर्वेदीय)७२-जाबाल्युपनिषद् (सामवेद)७३-तारसारोपनिषद् (शुक्लयजुर्वेदीय)७४-तारोपनिषद्७५-तुरीयातीतोपनिषद् (तीतावधूतो०) (शुक्लयजुर्वेदीय)७६-तुरीयोपनिषद्७७-तुलस्युपनिषद्७८-तेजोबिन्दुपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)७९-तैत्तरीयोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)८०-त्रिपादविभूतिमहानारायणोपनिषद् (सामवेद)८१-त्रिपुरातापिन्युपनिषद् (सामवेद)८२-त्रिपुरोपनिषद् (ऋग्वेदीय)८३-त्रिपुरामहोपनिषद्८४-त्रिशिखिब्राह्मणोपनिषद् (शुक्लयजुर्वेदीय)८५-त्रिसुपर्णोपनिषद्८६-दक्षिणामूर्त्युपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)८७-दत्तात्रेयोपनिषद् (सामवेद)८८-दत्तोपनिषद्८९-दुर्वासोपनिषद्९०- (१) देव्युपनिषद् (पद्यात्मक एवं मन्त्रात्मक) (सामवेद) * (२) देव्युपनिषद् (शिवरहस्यान्तर्गत-अनुपलब्ध)९१-द्वयोपनिषद्९२-ध्यानबिन्दुपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)९३-नादबिन्दुपनिषद् (ऋग्वेदीय)९४-नारदपरिब्राजकोपनिषद् (सामवेद)९५-नारदोपनिषद्९६-नारायणपूर्वतापिन्युपनिषद्९७-नारायणोत्तरतापिन्युपनिषद्९८-नारायणोपनिषद् (नारायणाथर्वशीर्ष) (कृष्णयजुर्वेदीय)९९-निरालम्बोपनिषद् (शुक्लयजुर्वेदीय)१००-निरुक्तोपनिषद्१०१-निर्वाणोपनिषद् (ऋग्वेदीय)१०२-नीलरुद्रोपनिषद्१०३-नृसिंहपूर्वतापिन्युपनिषद्१०४-नृसिंहषटचक्रोपनिषद्१०५-नृसिंहोत्तरतापिन्युपनिषद् (सामवेद)१०६-पंचब्रह्मोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)१०७-परब्रह्मोपनिषद् (सामवेद)१०८-परमहंसपरिब्राजकोपनिषद् (सामवेद)१०९-परमहंसोपनिषद् (शुक्लयजुर्वेदीय)११०-पारमात्मिकोपनिषद्१११-पारायणोपनिषद्११२-पाशुपतब्राह्मोपनिषद् (सामवेद)११३-पिण्डोपनिषद्११४-पीताम्बरोपनिषद्११५-पुरुषसूक्तोपनिषद्११६-पैंगलोपनिषद् (शुक्लयजुर्वेदीय)११७-प्रणवोपनिषद् (पद्यात्मक)११८-प्रणवोपनिषद् (वाक्यात्मक११९-प्रश्नोपनिषद् (सामवेद)१२०-प्राणाग्निहोत्रोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)१२१-बटुकोपनिषद (बटुकोपनिषध)१२२-ब्रह्वृचोपोपनिषद् (ऋग्वेदीय)१२३-बाष्कलमन्त्रोपनिषद्१२४-बिल्वोपनिषद् (पद्यात्मक)१२५-बिल्वोपनिषद् (वाक्यात्मक)१२६-बृहज्जाबालोपनिषद् (सामवेद)१२७-बृहदारण्यकोपनिषद् (शुक्लयजर्वेदीय)१२८-ब्रह्मविद्योपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)१२९-ब्रह्मोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)१३०-भगवद्गीतोपनिषद्१३१-भवसंतरणोपनिषद्१३२-भस्मजाबालोपनिषद् (सामवेद)१३३-भावनोपनिषद् (कापिलोपनिषद्) (सामवेद)१३४-भिक्षुकोपनिष (शुक्लयजुर्वेदीय)१३५-मठाम्नयोपनिषद्१३६-मण्डलब्राह्मणोपनिषद् (शुक्लयजुर्वेदीय)१३७-मन्त्रिकोपनिषद् (चूलिकोपनिषद्) (शुक्लयजुर्वेदीय)१३८-मल्लायुपनिषद्१३९-महानारायणोपनिषद् (बृहन्नारायणोपनिषद्, उत्तरनारायणोपनिषद्)१४०-महावाक्योपनिषद्१४१-महोपनिषद् (सामवेद)१४२-माण्डूक्योपनिषद् (सामवेद)१४३-माण्डुक्योपनिषत्कारिका(क)-आगम(ख)-अलातशान्ति(ग)-वैतथ्य(घ)-अद्वैत१४४-मुक्तिकोपनिषद् (शुक्लयजर्वेदीय)१४५-मुण्डकोपनिषद् (सामवेद)१४६-मुद्गलोपनिषद् (ऋग्वेदीय)१४७-मृत्युलांगूलोपनिषद्१४८-मैत्रायण्युपनिषद् (सामवेद)१४९-मैत्रेव्युपनिषद् (सामवेद)१५०-यज्ञोपवीतोपनिषद्१५१-याज्ञवल्क्योपनिषद् (शुक्लयजुर्वेदीय)१५२-योगकुण्डल्युपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)१५३-योगचूडामण्युपनिषद् (सामवेद)१५४-(१) योगतत्त्वोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)१५५-(२) योगतत्त्वोपनिषद्१५६-योगराजोपनिषद्१५७-योगशिखोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)१५८-योगोपनिषद्१५९-राजश्यामलारहस्योपनिषद्१६०-राधोकोपनिषद् (वाक्यात्मक)१६१-राधोकोपनिषद् (प्रपठात्मक)१६२-रामपूर्वतापिन्युपनिषद् (सामवेद)१६३-रामरहस्योपनिषद् (सामवेद)१६४-रामोत्तरतापिन्युपनिषद्१६५-रुद्रहृदयोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)१६६-रुद्राक्षजाबालोपनिषद् (सामवेद)१६७-रुद्रोपनिषद्१६८-लक्ष्म्युपनिषद्१६९-लांगूलोपनिषद्१७०-लिंगोपनिषद्१७१-बज्रपंजरोपनिषद्१७२-बज्रसूचिकोपनिषद् (सामवेद)१७३-बनदुर्गोपनिषद्१७४-वराहोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)१७५-वासुदेवोपनिषद् (सामवेद)१७६-विश्रामोपनिषद्१७७-विष्णुहृदयोपनिषद्१७८-शरभोपनिषद् (सामवेद)१७९-शाट्यायनीयोपनिषद् (शुक्लयजुर्वेदीय)१८०-शाण्डिल्योपनिषद् (सामवेद)१८१-शारीरकोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)१८२-(१) शिवसंकल्पोपनिषद्१८३-(२) शिवसंकल्पोपनिषद्१८४-शिवोपनिषद्१८५-शुकरहस्योपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)१८६-शौनकोपनिषद्१८७-श्यामोपनिषद्१८८-श्रीकृष्णपुरुषोत्तमसिद्धान्तोपनिषद्१८९-श्रीचक्रोपनिषद्१९०-श्रीविद्यात्तारकोपनिषद्१९१-श्रीसूक्तम१९२-श्वेताश्वतरोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)१९३-षोढोपनिषद्१९४-संकर्षणोपनिषद्१९५-सदानन्दोपनिषद्१९६-संन्यासोपनिषद् (अध्यायात्मक) (सामवेद)१९७-संन्यासोपनिषद् (वाक्यात्मक)१९८-सरस्वतीरहस्योपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)२००-सर्वसारोपनिषद् (सर्वोप०) (कृष्णयजुर्वेदीय)२०१-स ह वै उपनिषद्२०२-संहितोपनिषद्२०३-सामरहस्योपनिषद्२०४-सावित्र्युपनिषद् (सामवेद)२०५-सिद्धाँन्तविठ्ठलोपनिषद्२०६-सिद्धान्तशिखोपनिषद्२०७-सिद्धान्तसारोपनिषद्२०८-सीतोपनिषद् (सामवेद)२०९-सुदर्शनोपनिषद्२१०-सुबालोपनिषद् (शुक्लयजुर्वेदीय)२११-सुमुख्युपनिषद्२१२-सूर्यतापिन्युपनिषद्२१३-सूर्योपनिषद् (सामवेद)२१४-सौभाग्यलक्ष्म्युपनिषद् (ऋग्वेदीय)२१५-स्कन्दोपनिषद् (कृष्णयजुर्वेदीय)२१६-स्वसंवेद्योपनिषद्२१७-हयग्रीवोपनिषद् (सामवेद)२१८-हंसषोढोपनिषद्२१९-हंसोपनिषद् (शुक्लयजुर्वेदीय)२२०-हेरम्बोपनिषद्
नाम संग्रह साभार :
उज्वल भविष्य दर्शन
ज्योतिष तंत्र वास्तु 
शोध संस्थान
आरा, भोजपुर, बिहार.
फ़ोन.-09334534189

Jyotish Salah Samadhan

ज्योतिषीय सलाह और समाधान के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं। यहाँ कुछ विकल्प दिए गए हैं:

*ज्योतिषी*

- वेदिक ज्योतिष के प्रसिद्ध विशेषज्ञ, जो विवाह, करियर और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान प्रदान करते हैं।
- ज्योतिषाचार्य मुकुंद नंदन :आरा भोजपुर बिहार में स्थित एक ज्योतिषी, जो कुंडली विश्लेषण और रत्न सलाह प्रदान करते हैं।
- मुकुंद नंदन : 26 वर्षों के अनुभव वाले ज्योतिषी, जो वैदिक ज्योतिष पर आधारित मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

*ज्योतिषीय उपाय*

3. *रत्न धारण*: कुंडली के अनुसार उपयुक्त रत्न धारण करना।
4. *मंत्र जप*: विशिष्ट मंत्रों का जप करना, जैसे कि हनुमान चालीसा या विष्णु सहस्रनाम।
5. *व्रत और पूजा*: विशिष्ट व्रत और पूजा करना, जैसे कि सोमवार व्रत या गोवर्धन पूजा।
6. *वास्तु दोष निवारण*: घर या कार्यालय में वास्तु दोषों का निवारण करना।
7. *दान और सेवा*: गरीबों को दान देना या सेवा करना।

*ऑनलाइन सेवाएं*

- मुकुंद नंदन जी आचार्य द्वारा संचालित भारतीय वैदिक ज्योतिष संस्थान, जो ज्योतिष और अंक ज्योतिष समाधान प्रदान करता है।

*विशिष्ट समस्याओं के लिए उपाय*

- विवाह में देरी: गुरुवार को पीले वस्त्र दान करना या बृहस्पति यंत्र स्थापित करना।
- धन समस्या: शनिवार को सरसों के तेल का दान करना या शनि मंत्र का जप करना।
- स्वास्थ्य समस्याएं: सोमवार को शिव मंदिर में जलाभिषेक करना या चंद्र देव की प्रार्थना करना।

यह ध्यान रखें कि ज्योतिषीय सलाह और समाधान व्यक्तिगत और विशिष्ट होते हैं, इसलिए किसी अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श करना उचित होगा।

Sunday, 17 May 2020

लड़की से चक्कर

मेरी डायरी से -- 
मध्य जुलाई 2015
नाम -- छ....ई 
पंप  हाउस 
अंधेरी - ४०००९३ 
मुम्बई  ( महाराष्ट्र) 
     
समस्या  - पति दूर - दूर रहता था.  गहरी छन-बिन से पता चला की वो एक कुंवारी  लड़की से चक्कर चला रहा है। आपका पतिदेव एक दुकान चलते है। दुकान के पास ही उस लडकी का घर था.  देर रात चुपके-चुके उस लड़की से बात करते थे.  पत्नी के पास आते ही फटकार देते थे. 
     
समस्य समाधान हेतु आपको निम्न सामग्रियां दी गयी -- 
1. सौत विद्वेषण तंत्र सामग्री 
2. अत्तर मोहिनी तंत्र सामग्री 
3. प्रचंड वशीकरण सामग्री ।। सामग्री निर्माण खर्च -- 5200 * 3 = ?.. 
इन सामग्रियों के प्रयोग  के साथ आपको 90 दिनों तक धैर्य रखने को कहा गया। 
परिणाम -- 
दोनो में झगड़ा हुआ। झगड़ा बढ़ कर मुक़दमे-बाजी में बदल गयी।लडकी ने यौन शोषण करने का मुकदमा कर दिया और तब  पति देव..  उस लड़की के चक्कर में गए जेल..  पत्नी काफी दौड़ -धुप कर अपने पति को छुडवाया। लड़की को मुवावजा भी देनी  पड़ी । पत्नी के इस सद -व्यवाहर पर पति शर्मिंदगी  जाहीर की । 
पति का उस लड़की के साथ अब चक्कर खत्म हो चूका है। पति ने दुकान भी  से हटा लिया ।। अब पत्नी को प्रेम देता है ।। कहा हुआ मानता   भी है। 
जय माता दी 🙏 
समाधान द्वारा : मुकुंद नंदन  
प्रस्तुति साभार :
उज्वल भविष्य दर्शन, 
ज्योतिष सलाह 
एवं 
तंत्र सामग्री 
प्राप्ति केंद्र, 
खेतारी नेहरू नगर 
करा- 80230
व्हात्सप्प - 09334534189
नोट --- किसी व्यक्ति को ऐसा लगे कि, यह घटना उन्ही का है..  तो हमें खेद है कि, मैं आपको. . यह बात स्पष्ट नहीं कर सकता !! इसकी वास्तविकता  जानने  लेने की क़तई कोशिश न करे. 
बस इतना अवश्य जाने की यह घटना सत्य है।

Friday, 7 February 2020

आर्य विधि से विवाह

आर्यों का आर्यावर्त या भारत में आर्य विधि से विवाह कर आर्यों/हिन्दुओं को उन्नति के तरफ बढ़ने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें. 
हिन्‍दू मैरिज एक्‍ट की धारा 5 में विवाह के लिए कुछ शर्तें दी गई हैं जिन्‍हें पूरा करने पर ही एक विवाह Valid या Legal माना जाता है। जिनमें लड़के का 21 वर्ष और लड़की का 18 वर्ष की आयु का होना आवश्‍यक है, इसके अलावा अन्‍य शर्तें जो कि इस अधिनियम में दी गई हैं उन्‍हें पूरा करना आवश्‍यक है।  आर्य समाज पद्धति से शादी करने वालों को ये शर्तें पूरा करना आवश्‍यक है साथ ही इसे वैध बनाने के लिए जिन कर्मकाण्‍डों अर्थात Rituals की जरूरत है वे भी एक विवाह में की जानी आवश्‍यक हैं। आर्य समाज उपरोक्‍त एक्‍ट के सभी मापदण्‍डों के अनुसार ही शादी संपन्‍न करवाता है इसीलिए इसे एक Valid Hindu Marriage माना जाता है और Arya Marriage Validation Act 1937 की धारा 19 भी इसे वैधता प्रदान करती है। विवाह सम्‍पन्‍न होने पर आर्य समाज द्वारा विवाह का सर्टिफिकेट भी दिया जाता है। 

आर्य समाज मंदिर वालों की भी अपनी प्रक्रिया और नियम हैं जिनको पूरा करने पर ही वे किसी शादी समारोह को संपन्‍न करने की अनुमति देते हैं। आजकल इनके द्वारा जिन दस्‍तावेजों या डॉक्‍यूमेंट्स की शादी से पहले मांग की जाती है वो इस प्रकार हैं- 

1 आयु का प्रमाणपत्र विवाह के इच्‍छुक पक्षकारों का जिससे ये तय किया जा सके कि लड़के ने 21 वर्ष और लड़की ने 18 वर्ष की उमर पूरी कर ली है। ये मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, आधार कार्ड, जन्‍म प्रमाण पत्र कुछ भी हो सकता है।

2- वर-वधू दोनों के द्वारा दिया गया एफिडेविट या शपथपत्र जिसमें उनकी आयु, उनका कोई जीवित पति या पत्‍नी ना होना और अन्‍य जानकारियां होंगी।

3- दो साक्षी जिनके पास पहचान पत्र होना आवश्‍यक है। 

4- शपथपत्र में यह भी जानकारी देना आवश्‍यक है कि दोनों पक्ष किसी सपिण्‍ड नातेदारी (Prohibited Degree of Relationship) के अंतर्गत नहीं आते ।

5- यदि वे तलाकशुदा हैं तो संबंधित डिक्री या ऑर्डर की कॉपी और यदि उनके जीवनसाथी की मृत्‍यु हो चुकी है तो डेथ सर्टिफिकेट

आर्य समाज मंदिर में इस प्रकार की गई शादियों का पूरा रिकॉर्ड भी रखा जाता है। ऐसा विवाह कानून की नजर में पूरी तरह मान्‍य है और यदि इसे चुनौ‍ती दी जाती है तो प्रमाणपत्र, साक्षियों और मंदिर के रिकॉर्ड से इसे आसानी से साबित किया जा सकता है। 
निवेदक - 
मुकुन्द नंदन "✒🏹🛕" 
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Your Mukund Nandan  
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09334534189 
आजकल जिस विधि से विवाह हो रही है .. वह तबतक वैध नहीं है .. जबतक उस विवाह का रजिस्टार के पास रजिस्ट्रेशन न करवा लिया जाये. ऐसे में आर्य विधि से की गयी विवाह श्रेष्ठ विकल्प और पूर्ण रूप से वैदिक विधान भी है. 
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Tuesday, 17 September 2019

एक बार जरूर सोचिए

🤦🏻‍♂

      *चूहा अगर पत्थर का हो तो*
             *सब उसे पूजते हैं*

      *मगर जिन्दा हो तो मारे बिना*
              *चैन नहीं लेते हैं*

         *साँप अगर पत्थर का हो*
            *तो सब उसे पूजते हैं*

       *मगर जिन्दा हो तो उसी वक़्त*
                   *मार देते हैं*

       *माँ बाप अगर "तस्वीरों" में हो*
               *तो सब पूजते हैं*

       *मगर जिन्दा है तो कीमत नहीं*
                    *समझते"*

       *बस यही समझ नहीं आता के*
       *ज़िन्दगी से इतनी नफरत क्यों*

                       *और*

        *पत्थरों से इतनी मोहब्बत क्यों*

          *जिस तरह लोग मुर्दे इंसान को*
           *कंधा देना पुण्य समझते हैं​*

       *काश" इस तरह' ज़िन्दा" इंसान*
       *को सहारा देंना पुण्य  समझने*
        *लगे तो ज़िन्दगी आसान हो*
                    *जायेगी​*

        *एक बार जरूर सोचिए*
सभlर - 
उज्ज्वल भविष्य दर्शन 
(ज्योतिष कार्यालय) 
नेहरू नगर,  
Ara- 802301
भोजपुर, बिहार। 
Call/व्हाट्सप्प - 09334534189
♥♥♥♥♥
                
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Monday, 16 September 2019

सेंधा नमक

सेंधा नमक : भारत से कैसे गायब कर दिया गया, शरीर के लिए Best Alkalizer है :-
आप सोच रहे होंगे की ये सेंधा नमक बनता कैसे है ?? आइये आज हम आपको बताते हैं कि नमक मुख्य कितने प्रकार होते हैं। एक होता है समुद्री नमक दूसरा होता है सेंधा नमक (rock salt) । सेंधा नमक बनता नहीं है पहले से ही बना बनाया है। पूरे उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में खनिज पत्थर के नमक को 'सेंधा नमक' या 'सैन्धव नमक', लाहोरी नमक आदि आदि नाम से जाना जाता है । जिसका मतलब है 'सिंध या सिन्धु के इलाक़े से आया हुआ'। वहाँ नमक के बड़े बड़े पहाड़ है सुरंगे है । वहाँ से ये नमक आता है। मोटे मोटे टुकड़ो मे होता है आजकल पीसा हुआ भी आने लगा है यह ह्रदय के लिये उत्तम, दीपन और पाचन मे मदद रूप, त्रिदोष शामक, शीतवीर्य अर्थात ठंडी तासीर वाला, पचने मे हल्का है । इससे पाचक रस बढ़्ते हैं। तों अंत आप ये समुद्री नमक के चक्कर से बाहर निकले। काला नमक ,सेंधा नमक प्रयोग करे, क्यूंकि ये प्रकर्ति का बनाया है ईश्वर का बनाया हुआ है। और सदैव याद रखे इंसान जरूर शैतान हो सकता है लेकिन भगवान कभी शैतान नहीं होता।

भारत मे 1930 से पहले कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था विदेशी कंपनीया भारत मे नमक के व्यापार मे आज़ादी के पहले से उतरी हुई है , उनके कहने पर ही भारत के अँग्रेजी प्रशासन द्वारा भारत की भोली भली जनता को आयोडिन मिलाकर समुद्री नमक खिलाया जा रहा है,
हुआ ये कि जब ग्लोबलाईसेशन के बाद बहुत सी विदेशी कंपनियो (अनपूर्णा,कैपटन कुक ) ने नमक बेचना शुरू किया तब ये सारा खेल शुरू हुआ ! अब समझिए खेल क्या था ?? खेल ये था कि विदेशी कंपनियो को नमक बेचना है और बहुत मोटा लाभ कमाना है और लूट मचानी है तो पूरे भारत मे एक नई बात फैलाई गई कि आओडीन युक्त नामक खाओ , आओडीन युक्त नमक खाओ ! आप सबको आओडीन की कमी हो गई है। ये सेहत के लिए बहुत अच्छा है आदि आदि बातें पूरे देश मे प्रायोजित ढंग से फैलाई गई । और जो नमक किसी जमाने मे 2 से 3 रूपये किलो मे बिकता था । उसकी जगह आओडीन नमक के नाम पर सीधा भाव पहुँच गया 8 रूपये प्रति किलो और आज तो 20 रूपये को भी पार कर गया है।

दुनिया के 56 देशों ने अतिरिक्त आओडीन युक्त नमक 40 साल पहले ban कर दिया अमेरिका मे नहीं है जर्मनी मे नहीं है फ्रांस मे नहीं ,डेन्मार्क मे नहीं , डेन्मार्क की सरकार ने 1956 मे आओडीन युक्त नमक बैन कर दिया क्यों ?? उनकी सरकार ने कहा हमने मे आओडीन युक्त नमक खिलाया !(1940 से 1956 तक ) अधिकांश लोग नपुंसक हो गए ! जनसंख्या इतनी कम हो गई कि देश के खत्म होने का खतरा हो गया ! उनके वैज्ञानिको ने कहा कि आओडीन युक्त नमक बंद करवाओ तो उन्होने बैन लगाया। और शुरू के दिनो मे जब हमारे देश मे ये आओडीन का खेल शुरू हुआ इस देश के बेशर्म नेताओ ने कानून बना दिया कि बिना आओडीन युक्त नमक भारत मे बिक नहीं सकता । वो कुछ समय पूर्व किसी ने कोर्ट मे मुकदमा दाखिल किया और ये बैन हटाया गया।

आज से कुछ वर्ष पहले कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था सब सेंधा नमक ही खाते थे ।

सेंधा नमक के फ़ायदे:-

सेंधा नमक के उपयोग से रक्तचाप और बहुत ही गंभीर बीमारियों पर नियन्त्रण रहता है । क्योंकि ये अम्लीय नहीं ये क्षारीय है (alkaline) क्षारीय चीज जब अमल मे मिलती है तो वो न्यूटल हो जाता है और रक्त अमलता खत्म होते ही शरीर के 48 रोग ठीक हो जाते हैं ।

ये नमक शरीर मे पूरी तरह से घुलनशील है । और सेंधा नमक की शुद्धता के कारण आप एक और बात से पहचान सकते हैं कि उपवास ,व्रत मे सब सेंधा नमक ही खाते है। तो आप सोचिए जो समुंदरी नमक आपके उपवास को अपवित्र कर सकता है वो आपके शरीर के लिए कैसे लाभकारी हो सकता है ??

सेंधा नमक शरीर मे 97 पोषक तत्वो की कमी को पूरा करता है ! इन पोषक तत्वो की कमी ना पूरी होने के कारण ही लकवे (paralysis)  का अटैक आने का सबसे बढ़ा जोखिम होता है सेंधा नमक के बारे में आयुर्वेद में बोला गया है कि यह आपको इसलिये खाना चाहिए क्योंकि सेंधा नमक वात, पित्त और कफ को दूर करता है।

यह पाचन में सहायक होता है और साथ ही इसमें पोटैशियम और मैग्नीशियम पाया जाता है जो हृदय के लिए लाभकारी होता है। यही नहीं आयुर्वेदिक औषधियों में जैसे लवण भाष्कर, पाचन चूर्ण आदि में भी प्रयोग किया जाता है।

समुद्री नमक के भयंकर नुकसान :-

ये जो समुद्री नमक है आयुर्वेद के अनुसार ये तो अपने आप मे ही बहुत खतरनाक है ! क्योंकि कंपनियाँ इसमे अतिरिक्त आओडीन डाल रही है। अब आओडीन भी दो तरह का होता है एक तो भगवान का बनाया हुआ जो पहले से नमक मे होता है । दूसरा होता है "industrial iodine"  ये बहुत ही खतरनाक है। तो समुद्री नमक जो पहले से ही खतरनाक है उसमे कंपनिया अतिरिक्त industrial iodine डाल को पूरे देश को बेच रही है। जिससे बहुत सी गंभीर बीमरिया हम लोगो को आ रही है । ये नमक मानव द्वारा फ़ैक्टरियों मे निर्मित है।

आम तौर से उपयोग मे लाये जाने वाले समुद्री नमक से उच्च रक्तचाप (high BP ) ,डाइबिटीज़, आदि गंभीर बीमारियो का भी कारण बनता है । इसका एक कारण ये है कि ये नमक अम्लीय (acidic) होता है । जिससे रक्त अम्लता बढ़ती है और रक्त अमलता बढ्ने से ये सब 48 रोग आते है । ये नमक पानी कभी पूरी तरह नहीं घुलता हीरे (diamond ) की तरह चमकता रहता है इसी प्रकार शरीर के अंदर जाकर भी नहीं घुलता और अंत इसी प्रकार किडनी से भी नहीं निकल पाता और पथरी का भी कारण बनता है ।

ये नमक नपुंसकता और लकवा (paralysis ) का बहुत बड़ा कारण है समुद्री नमक से सिर्फ शरीर को 4 पोषक तत्व मिलते है ! और बीमारिया जरूर साथ मे मिल जाती है !

रिफाइण्ड नमक में 98% सोडियम क्लोराइड ही है शरीर इसे विजातीय पदार्थ के रुप में रखता है। यह शरीर में घुलता नही है। इस नमक में आयोडीन को बनाये रखने के लिए Tricalcium Phosphate, Magnesium Carbonate, Sodium Alumino Silicate जैसे रसायन मिलाये जाते हैं जो सीमेंट बनाने में भी इस्तेमाल होते है। विज्ञान के अनुसार यह रसायन शरीर में रक्त वाहिनियों को कड़ा बनाते हैं, जिससे ब्लाक्स बनने की संभावना और आक्सीजन जाने मे परेशानी होती है। जोड़ो का दर्द और गढिया, प्रोस्टेट आदि होती है। आयोडीन नमक से पानी की जरुरत ज्यादा होती है। 1 ग्राम नमक अपने से 23 गुना अधिक पानी खींचता है। यह पानी कोशिकाओ के पानी को कम करता है। इसी कारण हमें प्यास ज्यादा लगती है।

निवेदन :पांच हजार साल पुरानी आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में भी भोजन में सेंधा नमक के ही इस्तेमाल की सलाह दी गई है। भोजन में नमक व मसाले का प्रयोग भारत, नेपाल, चीन, बंगलादेश और पाकिस्तान में अधिक होता है। आजकल बाजार में ज्यादातर समुद्री जल से तैयार नमक ही मिलता है। जबकि 1960 के दशक में देश में लाहौरी नमक मिलता था। यहां तक कि राशन की दुकानों पर भी इसी नमक का वितरण किया जाता था। स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता था। समुद्री नमक के बजाय सेंधा नमक का प्रयोग होना चाहिए।

आप इस अतिरिक्त आओडीन युक्त समुद्री नमक खाना छोड़िए और उसकी जगह सेंधा नमक खाइये !! सिर्फ आयोडीन के चक्कर में समुद्री नमक खाना समझदारी नहीं है, क्योंकि जैसा हमने ऊपर बताया आओडीन हर नमक मे होता है सेंधा नमक मे भी आओडीन होता है बस फर्क इतना है इस सेंधा नमक मे प्राकृतिक के द्वारा भगवान द्वारा बनाया आओडीन होता है इसके इलावा आओडीन हमें आलू, अरवी के साथ-साथ हरी सब्जियों से भी मिल जाता है।।ॐ।।

Sunday, 4 August 2019

अपने डॉक्टर खुद बने

अपने डॉक्टर खुद बने
==========Uनमक प्रयोग करे!थायराईड बी पी और पेट ठीक होगा!
2 = केवल स्टील का कुकर ही प्रयोग करें!अल्युमिनियम में मिले हुए लेड से होने वाले नुकसानों से बचेंगे!
3 = कोई भी रिफाइंड तेल ना खाकर केवल तिल! मूंगफली सरसों और नारियल का प्रयोग करें!रिफाइंड में बहुत केमिकल होते है!जो शरीर में कई तरह की बीमारियाँ पैदा करते है!
4 = सोयाबीन बड़ी को 2 घण्टे भिगो कर मसल कर ज़हरीली झाग निकल कर ही प्रयोग करे!
5 = रसोई में एग्जास्ट फैन जरूरी है!प्रदूषित हवा बाहर करे!
6 = काम करते समय स्वयं को अच्छा लगने वाला संगीत चलाएं। खाने में भी अच्छा प्रभाव आएगा और थकान कम होगी!
7 = देसी गाय के घी का प्रयोग बढ़ाएं। अनेक रोग दूर होंगे, वजन नहीं बढ़ता!
8 = ज्यादा से ज्यादा मीठा नीम/कढ़ी पत्ता खाने की चीजों में डालें सभी का स्वास्थ्य ठीक करेगा!
9 = ज्यादा से ज्यादा चीजें लोहे की कढ़ाई में ही बनाएं! आयरन की कमी किसी को नहीं होगी!
10 = भोजन का समय निश्चित करे!पेट ठीक रहेगा! भोजन के बीच बात न करें!भोजन ज्यादा पोषण देगा!
11 = नाश्ते में अंकुरित अन्न शामिल करें!पोषक विटामिन और फाइबर मिलेंगे!
12 = सुबह के खाने के साथ देशी गाय के दूध का बना ताजा दही लें पेट ठीक रहेगा!
13 = चीनी कम से कम प्रयोग करें!ज्यादा उम्र में हड्डियां ठीक रहेंगी!
14 = चीनी की जगह बिना मसले का गुड़ या देशी शक्कर ले!
15 = छौंक में राई के साथ कलौंजी का भी प्रयोग करे! फायदे इतने कि लिख ही नहीं सकते!
16 = चाय के समय आयुर्वेदिक पेय की आदत बनाएं व निरोग रहेंगे!
17 = एक डस्टबिन रसोई में और एक बाहर रखें!सोने से पहले रसोई का कचरा बाहर के डस्ट बिन में डालें!
18 = रसोई में घुसते ही नाक में घी या सरसों का तेल लगाएं सर और फेफड़े स्वस्थ रहेंगें!
19 = करेले मैथी और मूली यानि कड़वी सब्जियां भी खाएँ, रक्त शुद्ध रहेगा!
20 = पानी मटके वाले से ज्यादा ठंडा न पिएं, पाचन व दांत ठीक रहेंगे!
21 = प्लास्टिक और अल्युमिनियम रसोई से हटाएं दोनों केन्सर कारक है!
22‌ = माइक्रोवेव ओवन का प्रयोग कैंसर कारक है!
23 = खाने की ठंडी चीजें कम से कम खाएँ पेट और दांत को खराब करती हैं!
24 = बाहर का खाना बहुत हानिकारक है!खाने से सम्बंधित ग्रुप से जुड़कर सब घर पर ही बनाएं!
25 = तली चीजें छोड़ें वजन पेट एसिडिटी ठीक रहेंगी!
26 = मैदा बेसन छौले राजमां और उड़द कम खाएँ गैस की समस्या से बचेंगे!
27 = अदरक अजवायन का प्रयोग बढ़ाएं गैस और शरीर के दर्द कम होंगे!
28 = बिना कलौंजी वाला अचार हानिकारक होता है!
29 = पानी का फिल्टर R O वाला हानिकारक है!-U V वाला ही प्रयोग करे!सस्ता भी और बढ़िया भी!
30 = रसोई में ही बहुत से कॉस्मेटिक्स हैं!इस प्रकार के ग्रुप से जानकारी लें!
31 = रात को आधा चम्मच त्रिफला एक कप पानी में डाल कर रखें!सुबह कपड़े से छान कर इस जल से आंखें धोएं, चश्मा उतर जाएगा। छानने के बाद जो पाउडर बचे उसे फिर एक गिलास पानी में डाल कर रख दें!रात को पी जाएं!पेट साफ होगा कोई रोग एक साल में नहीं रहेगा
32 = सुबह रसोई में चप्पल न पहनें शुद्धता भी एक्यू प्रेशर भी!
33 = रात का भिगोया आधा चम्मच कच्चा जीरा सुबह खाली पेट चबा कर वही पानी पिएं एसिडिटी खतम!
34 = एक्यूप्रेशर वाले पिरामिड प्लेटफार्म पर खड़े होकर खाना बनाने की आदत बना लें तो भी सब बीमारियां शरीर से निकल जायेंगी!
35 = चौथाई चम्मच दालचीनी का कुल उपयोग दिन भर में किसी भी रूप में करने पर निरोगता अवश्य होगी!
36 = रसोई के मसालों से बनी चाय मसाला स्वास्थ्यवर्धक है!
37 = सर्दियों में नाखून के बराबर जावित्री कभी चूसने से सर्दी के असर से बचाव होगा!
38 = सर्दी में बाहर जाते समय 2 चुटकी अजवायन मुहं में रखकर निकलिए सर्दी से नुकसान नहीं होगा!
39 = रस निकले नीबू के चौथाई टुकड़े में जरा सी हल्दी! नमक फिटकरी रख कर दांत मलने से दांतों का कोई भी रोग नहीं रहेगा!
40 = कभी - कभी नमक - हल्दी में 2 बून्द सरसों का तेल डाल कर दांतों को उंगली से साफ करें दांतों का कोई रोग टिक नहीं सकता!
41 = बुखार में 1 लीटर पानी उबाल कर 250 ml कर लें, साधारण ताप पर आ जाने पर रोगी को थोड़ा थोड़ा दें, दवा का काम करेगा!
42 = सुबह के खाने के साथ घर का जमाया देशी गाय का ताजा दही जरूर शामिल करें! प्रोबायोटिक का काम करेगा!
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     हृदय की बीमारी के आयुर्वेदिक इलाज!
हमारे देश भारत मे 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे!उनका नाम था महाऋषि वागवट जी!!

उन्होने एक पुस्तक लिखी थी!जिसका नाम है अष्टांग हृदयम!-(Astang Hridayam)

इस पुस्तक मे उन्होने बीमारियो को ठीक करने के लिए 7000 सूत्र लिखे थे!
              यह उनमे से ही एक सूत्र है !! 

वागवट जी लिखते है!कि कभी भी हृदय को घात हो रहा है!मतलब दिल की नलियों मे Blockage होना शुरू हो रहा है तो इसका मतलब है कि रक्त (Blood) मे Acidity (अम्लता) बढ़ी हुई है! 

अम्लता आप समझते है!जिसको अँग्रेजी में Acidity भी कहते हैं और यह अम्लता दो तरह की होती है !

एक होती है पेट कि अम्लता ! 
और 
एक होती है रक्त (Blood) की अम्लता !

आपके पेट मे अम्लता जब बढ़ती है तो आप कहेंगे पेट मे जलन सी हो रही है!खट्टी खट्टी डकार आ रही है!मुंह से पानी निकल रहा है!और अगर ये अम्लता (Acidity) और बढ़ जाये तो इसे Hyperacidity कहते हैं!

फिर यही पेट की अम्लता बढ़ते - बढ़ते जब रक्त मे आती है!तो रक्त अम्लता-(Blood Acidity) होती है!और जब Blood मे Acidity बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त दिल की नलियों में से निकल नहीं पाता और नलियों में Blockage कर देता है और तभी Heart Attack होता है!इसके बिना Heart Attack नहीं होता और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है!जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं!क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है !! 
           एसीडिटी का इलाज क्या है!
वागबट जी आगे लिखते है कि जब रक्त (Blood) में अम्लता (Acidity) बढ़ गई है!तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करें जो क्षारीय है!

आप जानते है!दो तरह की चीजे होती है!

अम्लीय (Acidic)
और 
क्षारीय (Alkaline)

अब अम्ल और क्षार (Acid and Alkaline) को मिला दें तो क्या होता है!

हम सब जानते है!Neutral होता है!

तो वागबट जी लिखते है!कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है! तो क्षारीय (Alkaline) चीजे खाओ!तो रक्त की अम्लता (Acidity) Neutral हो जाएगी और जब रक्त मे अम्लता Neutral हो गई तो Heart Attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं होगी!

ये है सारी कहानी!

अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजे है जो क्षारीय है! और हम खाये!

आपके रसोई घर मे ऐसी बहुत सी चीजे है जो क्षारीय है! जिन्हें अगर आप खायें तो कभी Heart Attack न आयेगा और अगर आ गया तो दुबारा नहीं आएगा!

आपके घर में जो सबसे ज्यादा क्षारीय चीज है वह है! लौकी जिसे हम दुधी भी कहते है!और English मे इसे Bottle Gourd भी कहते हैं जिसे आप सब्जी के रूप मे खाते है!

इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है!इसलिये आप हर रोज़ लौकी का रस निकाल कर पियें या अगर खा सकते है!तो कच्ची लौकी खायें!

वागवतट जी के अनुसार रक्त की अम्लता कम करने की सबसे ज्यादा ताकत लौकी में ही है!इसलिए आप लौकी के रस का सेवन करें!

कितना मात्रा में सेवन करें!

रोज 200 से 300 ग्राम लौकी का रस ग्राम पियें!

कब पिये!

सुबह खाली पेट (Toilet) शौच जाने के बाद पी सकते है!या फिर नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते हैं!

इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय भी बना सकते हैं!जिसके लिए इसमें 7 से 10 पत्ते के तुलसी के डाल लें क्योंकि तुलसी बहुत क्षारीय है!

इसके साथ आप पुदीने के 7 से 10 पत्ते भी मिला सकते है!क्योंकि पुदीना भी बहुत क्षारीय होता है!

इसके साथ आप इसमें काला नमक या सेंधा नमक भी जरूर डाले!ये भी बहुत क्षारीय है!याद रखे नमक काला या सेंधा ही डालें दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डालें!

ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है!

तो मित्रों आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करे 2 से 3 महीने आपकी सारी Heart की Blockage ठीक कर देगा!-21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा और फिर आपको कोई आपरेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी!

घर मे ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा और आपका अनमोल शरीर और लाखों रुपए आपरेशन के बच जाएँगे और जो पैसे बच जायें उसे अगर इच्छा हो किसी गौशाला मे दान कर दें क्योंकि डाक्टर को देने से अच्छा है किसी गौशाला दान दे!

हमारी गौ माता बचेगी तो भारत बचेगा....!!
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हल्दी का पानी
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पानी में हल्दी मिलाकर पीने से यह 7 फायदें होते है...!!

1. गुनगुना हल्दी वाला पानी पीने से दिमाग तेज होता है! सुबह के समय हल्दी का गुनगुना पानी पीने से दिमाग तेज और उर्जावान बनता है!

2.‌ आप यदि रोज़ हल्दी का पानी पीते हैं!तो इससे खून में होने वाली गंदगी साफ होती है!और खून जमता भी नहीं है!यह खून साफ करता है!और दिल को बीमारियों से भी बचाता है!

3. लीवर की समस्या से परेशान लोगों के लिए हल्दी का पानी किसी औषधि से कम नही है!क्योंकि हल्दी का पानी टाॅक्सिस लीवर के सेल्स को फिर से ठीक करता है! इसके अलावा हल्दी और पानी के मिले हुए गुण लीवर को संक्रमण से भी बचाते हैं!

4. हार्ट की समस्या से परेशान लोगों को हल्दी वाला पानी पीना चाहिए क्योंकि हल्दी खून को गाढ़ा होने से बचाती है जिससे हार्ट अटैक की संभावना कम हो जाती है...!!

5. जब हल्दी के पानी में शहद और नींबू मिलाया जाता है!तब यह शरीर के अंदर जमे हुए विषैले पदार्थों को निकाल देता है!जिसे पीने से शरीर पर बढ़ती हुई उम्र का असर नहीं पड़ता है!हल्दी में फ्री रेडिकल्स होते हैं जो सेहत और सौंदर्य को बढ़ाते है...!!

6. शरीर में किसी भी तरह की सूजन हो और वह किसी दवाई से ना ठीक हो रही हो तो आप हल्दी वाला पानी का सेवन करें!हल्दी में करक्यूमिन तत्व होता है!जो सूजन और जोड़ों में होने वाले असहय दर्द को ठीक कर देता है! सूजन की अचूक दवा है हल्दी का पानी!

7. कैंसर खत्म करती है हल्दी!हल्दी कैंसर से लड़ती है! और उसे बढ़ने से भी रोक देती है!क्योंकि हल्दी एंटी - कैंसर युक्त होती है!और यदि आप सप्ताह में तीन दिन हल्दी वाला पानी पीएगें तो आपको भविष्य में कैंसर से हमेशा बचे रहेगे!
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हमारे वेदों के अनुसार स्वस्थ रहने के १५ नियम हैं...!!

१ - खाना खाने के १.३० घंटे बाद ही पानी पीना चाहिए!

२ - पानी घूँट घूँट करके पीना है!जिससे अपनी मुँह की लार पानी के साथ मिलकर पेट में जा सके पेट में Acid बनता है और मुँह में छार दोनो पेट में बराबर मिल जाए तो कोई रोग पास नहीं आएगा!

३ - पानी कभी भी ठंडा (फ़्रिज़ का) नहीं पीना है!

४ - सुबह उठते ही बिना क़ुल्ला किए २ ग्लास पानी पीना चाहिए!रात भर जो अपने मुँह में लार है!वो अमूल्य है! उसको पेट में ही जाना ही  चाहिए!

५ - खाना जितने आपके मुँह में दाँत है!उतनी बार ही चबाना है!

६ - खाना ज़मीन में पलोथी मुद्रा में बैठकर या उखड़ूँ बैठकर ही खाना चाहिए!

७ - खाने के मेन्यू में एक दूसरे के विरोधी भोजन एक साथ ना करे जैसे दूध के साथ दही प्याज़ के साथ दूध दही के साथ उड़द की दlल!

८ - समुद्री नमक की जगह सेंधा नमक या काला नमक खाना चाहिए!

९ - रीफ़ाइन तेल डालडा ज़हर है!इसकी जगह अपने इलाक़े के अनुसार सरसों तिल मूँगफली या नारियल का तेल उपयोग में लाए!सोयाबीन के कोई भी प्रोडक्ट खाने में ना ले इसके प्रोडक्ट को केवल सुअर पचा सकते है! आदमी में इसके पचाने के एंज़िम नहीं बनते हैं!

१० - दोपहर के भोजन के बाद कम से कम ३० मिनट आराम करना चाहिए और शाम के भोजन बाद ५०० क़दम पैदल चलना चाहिए!

११ - घर में चीनी (शुगर) का उपयोग नहीं होना चाहिए क्योंकि चीनी को सफ़ेद करने में १७ तरह के ज़हर (केमिकल ) मिलाने पड़ते है!इसकी जगह गुड़ का उपयोग करना चाहिए और आज कल गुड़ बनाने में कॉस्टिक सोडा (ज़हर) मिलाकर गुड को सफ़ेद किया जाता है!इसलिए सफ़ेद गुड़ ना खाए!प्राकृतिक गुड़ ही खाये!प्राकृतिक गुड़ चाकलेट कलर का होता है!

१२ - सोते समय आपका सिर पूर्व या दक्षिण की तरफ़ होना चाहिए!

१३ - घर में कोई भी अलूमिनियम के बर्तन या कुकर नहीं होना चाहिए!हमारे बर्तन मिट्टी पीतल लोहा और काँसा के होने चाहिए!
१४ - दोपहर का भोजन ११ बजे तक अवश्य और शाम का भोजन सूर्यास्त तक हो जाना चाहिए!

१५ - सुबह भोर के समय तक आपको देशी गाय के दूध से बनी छाछ (सेंधl नमक और ज़ीरा बिना भुना हुआ मिलाकर) पीना चाहिए!

यदि आपने ये नियम अपने जीवन में लागू कर लिए तो आपको डॉक्टर के पास जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी और देश के ८ लाख करोड़ की बचत होगी!यदि आप बीमार है!तो ये नियमों का पालन करने से आपके शरीर के सभी रोग (BP, शुगर ) अगले ३ माह से लेकर १२ माह में ख़त्म हो जाएँगे!
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सर्दियों में उठायें मेथी दानों से भरपूर लाभ
     ➡ मेथीदाना उष्ण वात व कफनाशक पित्तवर्धक पाचनशक्ति व बलवर्धक एवं ह्रदय के लिए हितकर है! यह पुष्टिकारक शक्ति स्फूर्तिदायक टॉनिक की तरह कार्य करता है!सुबह–शाम इसे पानी के साथ निगलने से पेट को निरोग बनाता है!कब्ज व गैस को दूर करता है!इसकी मूँग के साथ सब्जी बनाकर भी खा सकते हैं!यह मधुमेह के रोगियों के लिए खूब लाभदायी है!

➡ अपनी आयु के जितने वर्ष व्यतीत हो चुके हैं!उतनी संख्या में मेथीदाने रोज धीरे–धीरे चबाना या चूसने से वृद्धावस्था में पैदा होने वाली व्याधियों जैसे घुटनों व जोड़ों का दर्द भूख न लगना हाथों का सुन्न पड़ जाना सायटिका मांसपेशियों का खिंचाव बार -बार मूत्र आना, चक्कर आना आदि में लाभ होता है!गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भुने मेथी दानों का चूर्ण आटे के साथ मिला के लड्डू बना के खाना लाभकारी है!
        मेथी दाने से शक्तिवर्धक पेय
दो चम्मच मेथीदाने एक गिलास पानी में ४ – ५ घंटे भिगोकर रखें फिर इतना उबालें कि पानी चौथाई रह जाय इसे छानकर २ चम्मच शहद मिला के पियें!
      औषधीय प्रयोग

1. कब्ज : २० ग्राम मेथीदाने को २०० ग्राम ताजे पानी में भिगो दें. ५-६ घंटे बाद मसल के पीने से मल साफ़ आने लगता है!भूख अच्छी लगने लगती है और पाचन भी ठीक होने लगता है!

2. जोड़ों का दर्द : १०० ग्राम मेथीदाने अधकच्चे भून के दरदरा कूट लें!इसमें २५ ग्राम काला नमक मिलाकर रख लें!-२ चम्मच यह मिश्रण सुबह-शाम गुनगुने पानी से फाँकने से जोड़ों कमर व घुटनों का दर्द आमवात (गठिया) का दर्द आदि में लाभ होता है!इससे पेट में गैस भी नहीं बनेगी!

3. पेट के रोगों में :१ से ३ ग्राम मेथी दानों का चूर्ण सुबह दोपहर व शाम को पानी के साथ लेने से अपच दस्त भूख न लगना अफरा दर्द आदि तकलीफों में बहुत लाभ होता है!

4. दुर्बलता : १ चम्मच मेथीदानों को घी में भून के सुबह - शाम लेने से रोगजन्य शारीरिक एवं तंत्रिका दुर्बलता दूर होती है!

5. मासिक धर्म में रुकावट : ४ चम्मच मेथीदाने १ गिलास पानी में उबालें!आधा पानी रह जाने पर छानकर गर्म–गर्म ही लेने से मासिक धर्म खुल के होने लगता है!

6. अंगों की जकड़न :भुनी मेथी के आटे में गुड़ की चाशनी मिला के लड्डू बना लें-१–१ लड्डू रोज सुबह खाने से वायु के कारण जकड़े हुए अंग १ सप्ताह में ठीक हो जाते हैं तथा हाथ–पैरों में होने वाला दर्द भी दूर होता है!

7. विशेष : सर्दियों में मेथीपाक मेथी के लड्डू मेथीदानों व मूँग–दाल की सब्जी आदि के रूप में इसका सेवन खूब लाभदायी हैं!
                 IMPORTANT
HEART ATTACK और गर्म पानी पीना!

यह भोजन के बाद गर्म पानी पीने के बारे में ही नहीं Heart Attack के बारे में भी एक अच्छा लेख है!

चीनी और जापानी अपने भोजन के बाद गर्म चाय पीते हैं!ठंडा पानी नहीं!अब हमें भी उनकी यह आदत अपना लेनी चाहिए!जो लोग भोजन के बाद ठंडा पानी पीना पसन्द करते हैं!यह लेख उनके लिए ही है!

भोजन के साथ कोई ठंडा पेय या पानी पीना बहुत हानिकारक है!क्योंकि ठंडा पानी आपके भोजन के तैलीय पदार्थों को जो आपने अभी अभी खाये हैं!ठोस रूप में बदल देता है!

इससे पाचन बहुत धीमा हो जाता है!जब यह अम्ल के साथ क्रिया करता है!तो यह टूट जाता है!और जल्दी ही यह ठोस भोजन से भी अधिक तेज़ी से आँतों द्वारा सोख लिया जाता है!यह आँतों में एकत्र हो जाता है!फिर जल्दी ही यह चरबी में बदल जाता है!और कैंसर के पैदा होने का कारण बनता है!

इसलिए सबसे अच्छा यह है!कि भोजन के बाद गर्म सूप या गुनगुना पानी पिया जाये!एक गिलास गुनगुना पानी सोने से ठीक पहले पीना चाहिए!इससे खून के थक्के नहीं बनेंगे और आप हृदयाघात से बचे रहेंगे!

एक हृदय रोग विशेषज्ञ का कहना है!कि यदि इस संदेश को पढ़ने वाला प्रत्येक व्यक्ति इसे १० लोगों को भेज दे, तो वह कम से कम एक जान बचा सकता है!
        
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